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Thursday, 18 December 2014

बक्श दे

बक्श दे !!

वो खुदा तुम्हारा,

उसकी खुदाई तुम्हारी,
यह आबो हवा तुम्हारी,
हमारी सांसे भी तुम्हारी,
यह फलक तुम्हारा, 
जमीं का जर्रा जर्रा तुम्हारा,
तुम खुद खुदा बन बैठे हो 
खुदा से डरते डरते...
तुम्हारे रहमो करम पर तो जीते है हम 
अब डर लगता है,
सहमी आँखे पलक भी नहीं झपकाती,
आंसुओने धुंधला कर दिया है यह जहाँ...
क्या पता कौनसे रूप में आ जाओ और...
.....और छलनी दीवारों को ताकते हुए हम दम तोड़ दे....
और तुम्हारे जमीं पर मेरे कब्र के लिए जगह हि ना मिले...
इसलिए....
इतना रहम कर बारूदों से लतपत मेरे खुदा 
तू तेरा फ़र्ज़ निभा 
और मुझे मेरा फ़र्ज़ निभाने की मोहलत दे....
हमें बक्श दे....
हमारे बच्चों को बक्श दे !!
हमारे बच्चों को बक्श दे !!!!